कहते है की किसी भी देश के विकाश की गाथा वहां की सड़कें गाती है। सड़के , जो भारत की नसे है,धमनियाँ हैं , जिनके बिना विकाश की बातें ही बेमानी है। सभी सरकारों के अपने -अपने दावे है सड़को को लेकर, सभी सुनते है जब वह कहते है की हमारे समय में इतने किलोमीटर सड़के रोज बनी , तो कोई कुछ और भी कहता है। पर सोचता हूँ कि देश में सड़के बनती है या पोती जाती है , पुरानी के ऊपर नई।
क्या आप सोच सकते है की ऊँची सड़को की वज़ह से बहुतेरे रा त में चैन से नहीं सोते। बरसाती रातो में उन घर की महिलाओं का नया काम हे पानी उलीचना। जी हा गड्ढ़ो के बाद यह एक नया भय है सड़को कोलेकर। पुरानी जस की तस सड़क पर नई सड़क पोत देने को क्या हम त्वरित विकास की संज्ञा दे सकते हे। क्या ऐसे ही हम लेथार्जिक विकास से पार पाएंगे।
यह उन सभी अमीरो या गरीबो के लिए एक साझा बिभीषिका हे जो पुरानी सड़क के किनारे रहते हे, सीढ़ियों से घर में चढ़ने वाले लोग सीढ़ियों से घर में उतारते है।
सड़क का पूरा पानी सैलांब बनकर घरो में घुसता हे और दिनभर की थकी महिलाये रात भर पानी उलीचती हे। उससे भी ज्यादह भयावह तो यह लगता हे की कोई भी इस विकास का रत्ती भर विरोध नहीं करता। ठेकेदार जब यह विकास कर रहे होते है तो लोग बस बच कर निकल जाते हे अपने काम पर, गोया सड़क उनके लिए नहीं बस पडोसी की लिए बन रही है. देश में जाती , धर्म आरछण के नाम पर अराजकता तो खूब होती है पर मौजूं सवालो पर चुप्पी साध जाते हे।
स्थिति की भयावहता सिर्फ शहरो तक सिमित नहीं हे। आजकल कुछ गांव जो सड़क किनारे थे अब सड़क के नीचे पहुंच गये हैं। .टेलीविज़न पर हर बारिशो में यही खबरे सुनने को मिलती है की फलां जगह पानी से सब डूब गया , और उसके विभिन्न कारण गिनाये जाते है पर कोई भी इस यछ प्रश्न पर खुलकर बात नहीं करता।
वह दिन दूर नहीं जब अनियंत्रित विकास सब कुछ लील जायेगा ।
Bahut sahi vichar hai apke aur sarkar ke afsarsahi ko bhi in jwalant muddo par sochna chahiye
ReplyDeleteRanjeet ka ochhal Chitran isi me Mohit Kiya Gaya
ReplyDeleteYah samasya har jagah hai sarkar ko dyan dena chahiye
ReplyDeleteRight sir but rajniti के कारण यह सब ः Rha hai
ReplyDeleteJarurat mouke par dhyan dene ki hai.
ReplyDeleteएक छुपी हुई परंतु वास्तविक समस्या का उलेक्ख किया है आपने।
ReplyDeletebagutsahi
ReplyDeleteAchha lekh hai
ReplyDeleteVery good
ReplyDeleteSandar
ReplyDelete